वाल्मीकि रामायण 7.59.3
न तावत्कृतकृत्यो ऽस्मि विषयेषु नरर्षभ ।अनुभूय तदा कामं ततः प्राप्स्याम्यहं जराम्॥
na tāvatkṛtakṛtyo 'smi viṣayeṣu nararṣabha |anubhūya tadā kāmaṃ tataḥ prāpsyāmyahaṃ jarām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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