वाल्मीकि रामायण 7.59.4
यदुस्तद्वचनं श्रुत्वा प्रत्युवाच नरर्षभम् ।पुत्रस्ते दयितः पूरुः प्रतिगृह्णातु वै जराम्॥
yadustadvacanaṃ śrutvā pratyuvāca nararṣabham |putraste dayitaḥ pūruḥ pratigṛhṇātu vai jarām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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