वाल्मीकि रामायण 7.59.5
बहिष्कृतो ऽहमर्थेषु सन्निकर्षाच्च पार्थिव ।प्रतिगृह्णातु वै राजन्क सहाश्नाति भोजनम्॥
bahiṣkṛto 'hamartheṣu sannikarṣācca pārthiva |pratigṛhṇātu vai rājanka sahāśnāti bhojanam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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