वाल्मीकि रामायण 7.59.8
पूरोर्वचनमाज्ञाय नाहुषः परया मुदा ।प्रहर्षमतुलं लेभे जरां सङ्क्रामयच्च ताम्॥
pūrorvacanamājñāya nāhuṣaḥ parayā mudā |praharṣamatulaṃ lebhe jarāṃ saṅkrāmayacca tām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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