वाल्मीकि रामायण 7.62.3
आहारः सर्वसत्त्वानि विशेषेण च तापसाः ।आचारो रौद्रता नित्यं वासो मधुवने तथा॥
āhāraḥ sarvasattvāni viśeṣeṇa ca tāpasāḥ |ācāro raudratā nityaṃ vāso madhuvane tathā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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