वाल्मीकि रामायण 7.63.14
अभिषिक्तस्तु शत्रुघ्नो बभौ चादित्यसन्निभः ।अभिषिक्तः पुरा स्कन्दः सेन्द्रैरिव मरुद्गणैः॥
abhiṣiktastu śatrughno babhau cādityasannibhaḥ |abhiṣiktaḥ purā skandaḥ sendrairiva marudgaṇaiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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