वाल्मीकि रामायण 7.66.4
तेषां तद्वचनं श्रुत्वा महर्षिः समुपागमत् ।बालचन्द्रप्रतीकाशौ देवपुत्रौ महौजसौ॥
teṣāṃ tadvacanaṃ śrutvā maharṣiḥ samupāgamat |bālacandrapratīkāśau devaputrau mahaujasau ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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