वाल्मीकि रामायण 7.68.3
एतस्मिन्नन्तरे वीरः शत्रुघ्नो यमुनां नदीम् ।तीर्त्वा मधुपुरद्वारि धनुष्पाणिरतिष्ठत॥
etasminnantare vīraḥ śatrughno yamunāṃ nadīm |tīrtvā madhupuradvāri dhanuṣpāṇiratiṣṭhata ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें