वाल्मीकि रामायण 7.68.5
ततो ददर्श शत्रुघ्नं स्थितं द्वारि धृतायुधम् ।तमुवाच ततो रक्षः किमनेन करिष्यसि॥
tato dadarśa śatrughnaṃ sthitaṃ dvāri dhṛtāyudham |tamuvāca tato rakṣaḥ kimanena kariṣyasi ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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