वाल्मीकि रामायण 7.70.12
यच्च तेन पुरा शुभ्रं लवणेन कृतं महत् ।तच्छोभयति शत्रुघ्नो नानावर्णोपशोभिताम्॥
yacca tena purā śubhraṃ lavaṇena kṛtaṃ mahat |tacchobhayati śatrughno nānāvarṇopaśobhitām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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