वाल्मीकि रामायण 7.90.5
च्यवनं भृगुपुत्रं च मुनिं चारिष्टनेमिनम् ।प्रमोदनं मोदकरं ततो दुर्वाससं मुनिम्॥
cyavanaṃ bhṛguputraṃ ca muniṃ cāriṣṭaneminam |pramodanaṃ modakaraṃ tato durvāsasaṃ munim ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें