वाल्मीकि रामायण 7.90.4
पुरुषत्वं गते शूरे बुधः परमबुद्धिमान् ।संवर्तं परमोदारमाजुहाव महायशाः॥
puruṣatvaṃ gate śūre budhaḥ paramabuddhimān |saṃvartaṃ paramodāramājuhāva mahāyaśāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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