वाल्मीकि रामायण 7.93.2
स दृष्ट्वा दिव्यसङ्काशं यज्ञमद्भुतदर्शनम् ।एकान्ते ऋषिवाटानां चकार उटजाञ्छुभान्॥
sa dṛṣṭvā divyasaṅkāśaṃ yajñamadbhutadarśanam |ekānte ṛṣivāṭānāṃ cakāra uṭajāñchubhān ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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