वाल्मीकि रामायण 7.94.2
तां स शुश्राव काकुत्स्थः पूर्वाचार्यविजिर्मिताम् ।अपूर्वां पाठ्यजातिं च गेयेन समलङ्कृताम्॥
tāṃ sa śuśrāva kākutsthaḥ pūrvācāryavijirmitām |apūrvāṃ pāṭhyajātiṃ ca geyena samalaṅkṛtām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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