वाल्मीकि रामायण 7.94.3
प्रमाणैर्बहुभिर्बद्धां तन्त्रीलयसमन्विताम् ।बालाभ्यां राघवः श्रुत्वा कौतूहलपरो ऽभवत्॥
pramāṇairbahubhirbaddhāṃ tantrīlayasamanvitām |bālābhyāṃ rāghavaḥ śrutvā kautūhalaparo 'bhavat ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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