वाल्मीकि रामायण 7.94.4
अथ कर्मान्तरे राजा समाहूय महामुनीन् ।पार्थिवांश्च नरव्याघ्रः पण्डितान्नैगमांस्तथा॥
atha karmāntare rājā samāhūya mahāmunīn |pārthivāṃśca naravyāghraḥ paṇḍitānnaigamāṃstathā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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