वाल्मीकि रामायण 7.98.18
आदिकाव्यमिदं राम त्वयि सर्वं प्रतिष्ठितम् ।नह्यन्यो ऽर्हति काव्यानां यशोभाग्राघवादृते॥
ādikāvyamidaṃ rāma tvayi sarvaṃ pratiṣṭhitam |nahyanyo 'rhati kāvyānāṃ yaśobhāgrāghavādṛte ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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