वाल्मीकि रामायण 7.98.19
श्रुतं ते पूर्वमेतद्धि मया सर्वं सुरैः सह ।दिव्यमद्भुतरूपं च सत्यवाक्यमनावृतम्॥
śrutaṃ te pūrvametaddhi mayā sarvaṃ suraiḥ saha |divyamadbhutarūpaṃ ca satyavākyamanāvṛtam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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