वाल्मीकि रामायण 5.34.2
अहं रामस्य सन्देशाद्देवि दूतस्तवागतः ।वैदेहि कुशली रामस्त्वां च कौशलमब्रवीत्॥
ahaṃ rāmasya sandeśāddevi dūtastavāgataḥ |vaidehi kuśalī rāmastvāṃ ca kauśalamabravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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