वाल्मीकि रामायण 5.37.2
अमृतं विषसंसृष्टं त्वया वानरभाषितम् ।यच्च नान्यमना रामो यच्च शोकपरायणः॥
amṛtaṃ viṣasaṃsṛṣṭaṃ tvayā vānarabhāṣitam |yacca nānyamanā rāmo yacca śokaparāyaṇaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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