वाल्मीकि रामायण 6.49.26
कृतं हनुमता कार्यं यदन्यैर्दुष्करं रणे ।ऋक्षराजेन तुष्यामि गोलाङ्गूलाधिपेन च॥
kṛtaṃ hanumatā kāryaṃ yadanyairduṣkaraṃ raṇe |ṛkṣarājena tuṣyāmi golāṅgūlādhipena ca ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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