वाल्मीकि रामायण 6.49.32
ततः सर्वाण्यनीकानि स्थापयित्वा विभीषणः ।आजगाम गदापाणिस्त्वरितो यत्र राघवः॥
tataḥ sarvāṇyanīkāni sthāpayitvā vibhīṣaṇaḥ |ājagāma gadāpāṇistvarito yatra rāghavaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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