वाल्मीकि रामायण 7.27.3
श्रुत्वा तु रावणं प्राप्तमिन्द्रश्चलित आसनात् ।अब्रवीत्तत्र तान् देवान् सर्वानेव समागतान्॥
śrutvā tu rāvaṇaṃ prāptamindraścalita āsanāt |abravīttatra tān devān sarvāneva samāgatān ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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