वाल्मीकि रामायण 7.59.2
यदो त्वमसि धर्मज्ञो मदर्थं प्रतिगृह्यताम् ।जरां परमिकां पुत्र भोगै रंस्ये महायशः॥
yado tvamasi dharmajño madarthaṃ pratigṛhyatām |jarāṃ paramikāṃ putra bhogai raṃsye mahāyaśaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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